कलेक्टर–सांसद टकराव गर्माया!

भाजपा सांसद मन्नालाल रावत का बड़ा आरोप — “प्रतापगढ़ कलेक्टर ने DMFT फंड में की भारी अनियमितता”
मुख्यमंत्री को भेजा पत्र, 50 विकास कार्य अटके… जनप्रतिनिधियों को गुमराह करने का गंभीर आरोप
प्रतापगढ़ में डीएमएफटी फंड को लेकर नया बवंडर खड़ा हो गया है। भाजपा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने प्रतापगढ़ कलेक्टर पर अनियमितताओं, लापरवाही और जनप्रतिनिधियों को गुमराह करने के आरोप लगाते हुए सीधे मुख्यमंत्री को पत्र भेज दिया है। पहले से ही कलेक्टर और भाजपा नेताओं के बीच चल रही तकरार अब और तेज होने के संकेत दे रही है। इस मामले में कलेक्टर डॉक्टर अंजली राजोरिया द्वारा वित्त शासन सचिव को लिखा गया पत्र भी सामने आया है जिसमें उन्होंने वित्तीय स्वीकृति मांगी है
क्या है पूरा मामला? सांसद रावत का विस्तृत पत्र आया सामने
सांसद मन्नालाल रावत ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया कि—
🔹 11 फरवरी 2025 की DMFT बैठक में कुल 54 विकास कार्य स्वीकृत हुए थे
इनमें से 32 कार्य विद्यालयों में कक्षा-कक्ष निर्माण से संबंधित थे।
🔹 राज्य सरकार ने विशेष निर्देश दिए थे
बारिश के कारण जर्जर हो चुकी स्कूल इमारतों को तुरंत सुधारने के लिए सरकार ने DMFT फंड से प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य कराने के आदेश दिए थे।
मुख्य सचिव द्वारा 26 नवंबर 2025 को सभी जिला कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश भी भेजे गए थे।
🔹 लेकिन कलेक्टर प्रतापगढ़ ने केवल 3 कार्यों को ही जारी किया
सांसद रावत के अनुसार, 54 में से सिर्फ 3 कार्यों के भुगतान आदेश जारी हुए, जबकि
बाकी 50 कार्यों को कलेक्टर ने बिना वजह लटका रखा है।
🔹 जनप्रतिनिधियों को गलत जानकारी देने का आरोप
रावत ने पत्र में लिखा है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बताया गया कि
“सभी कार्य स्वीकृत कर दिए गए हैं”,
जबकि वास्तविकता इससे उलट है।
सांसद का आरोप — “यह गंभीर लापरवाही और जनता के विश्वास के साथ छल”
रावत ने पत्र में कहा कि
“कलेक्टर कार्यालय द्वारा जनप्रतिनिधियों को गलत जानकारी दी गई, जो गंभीर लापरवाही तथा जनभावनाओं के विपरीत है।”
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि—
✔ कलेक्टर प्रतापगढ़ को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए
✔ सभी 50 अटके हुए विकास कार्यों की स्वीकृति शीघ्र जारी कराई जाए
कलेक्टर–भाजपा नेताओं का विवाद पहले से सुर्खियों में
जिले में भाजपा नेताओं और कलेक्टर के बीच तनातनी पहले भी चर्चा में रही है।
अब DMFT फंड की कथित अनियमितताओं ने इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है।
DMFT फंड क्या है, क्यों बढ़ा विवाद?
DMFT—जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट—का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में
स्कूल, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल जैसी सुविधाओं के लिए फंडिंग करना है।
प्रतापगढ़ जैसे आदिवासी बहुल जिले में इसका महत्व और बढ़ जाता है।
आगे क्या?
सांसद रावत के पत्र के बाद अब निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्रवाई पर टिकी हैं।
क्या कलेक्टर से जवाब तलब होगा?
क्या अटके 50 कार्यों की फाइलें आगे बढ़ेंगी?
या विवाद और गहराएगा?
इस पूरे प्रकरण ने प्रतापगढ़ की राजनीतिक जमीन को एक बार फिर गर्म कर दिया है।

Author: Kanthal Media
Pratapgarh
