
प्रतापगढ़। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व जनजातीय कैबिनेट मंत्री नंदलाल मीणा का लंबी बीमारी के चलते 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। अहमदाबाद के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे कांठल क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि नंदलाल मीणा ने हमेशा समाज और क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी।

नंदलाल मीणा का जन्म 25 जनवरी 1946 को प्रतापगढ़ जिले की अंबामाता पंचायत के खेड़ा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम किशनलाल और माता का नाम देवाबाई था। उन्होंने उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से बी.ए. और एल.एल.बी. की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद खेती-बाड़ी के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय हो गए।
20 जून 1968 को उन्होंने सक्रिय राजनीति की शुरुआत की और भाजपा से जुड़कर लगातार संगठन को मजबूत किया। वे लंबे समय तक प्रतापगढ़-धरियावद क्षेत्र के जनजातीय समाज के सबसे बड़े नेता माने जाते रहे।
मीणा ने 1968 से सक्रिय राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर जनजातीय समाज के एक मजबूत स्तंभ बने। 1993 में उन्हें समाज कल्याण मंत्री का पद मिला। इसके बाद वे जनजातीय विकास मंत्री और राज्य सरकार में कई अहम विभागों के कैबिनेट मंत्री भी रहे।अपने राजनीतिक करियर में उन्होंने आदिवासी अंचल के विकास को हमेशा प्राथमिकता दी और शिक्षा, सड़क व सामाजिक उत्थान के लिए कई पहल कीं।
साल 2018 में तबीयत खराब होने के कारण उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। पार्टी ने उनके बेटे हेमंत मीणा को चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि उस चुनाव में उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी रामलाल मीणा से हार का सामना करना पड़ा। मगर 2023 के विधानसभा चुनाव में हेमंत मीणा ने शानदार जीत दर्ज की और राजस्थान सरकार में उन्हें राजस्व मंत्री का पद मिला।
नंदलाल मीणा अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई बार विधायक और मंत्री रहे। वे जनजातीय समाज के सशक्त नेता के रूप में पहचान रखते थे और विकास कार्यों में उनकी विशेष भूमिका रही।
भाजपा नेताओं की श्रद्धांजलि
नंदलाल मीणा के निधन पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया। नेताओं ने कहा कि उनके जाने से कांठल ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान की राजनीति को अपूरणीय क्षति हुई है।
Author: Kanthal Media
Pratapgarh
